Home ट्रेंडिंग अनुराग कश्यप के Twitter छोड़ने पर सवाल : क्या हम ‘गुंडों’ के देश में रह रहे हैं ?

अनुराग कश्यप के Twitter छोड़ने पर सवाल : क्या हम ‘गुंडों’ के देश में रह रहे हैं ?

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अनुराग कश्यप ने बेईंतहा दुखी होकर Twitter छोड़ दिया है। ट्वीटर छोड़ने से पहले बोला है कि आज के बाद कुछ नहीं बोलेंगे। सवाल ये है कि हम झुंड में हांकी जाने वाली भेड़ हैं या फिर हम गुंडों के देश में रह रहे हैं, जहां उनकी मर्जी के खिलाफ बोला गया एक भी शब्द गुनाह है ?

ये दो Tweet करने के बाद कश्यप ने अकउंटवा डिलीट कर दिया 🙁
कुछ भाई लोगों ने फौरन इसका स्क्रीनशॉट निकाल लिया

अनुराग कश्यप के इस आखिरी ट्वीट का स्नैपशॉट हर जगह वायरल हो रहा है। हालांकि ये ट्वीट करने के कुछ सेकंड्स बाद ही अनुराग ने अपना Twitter अकाउंट डिलीट भी कर दिया। अब आपको ये ट्वीट और अनुराग का प्रोफाइल ट्वीटर पर ढूंढे नहीं मिलेगा। वो तो भला हो कुछ भाई लोगों का जिन्होंने सेकंड्स के भीतर ही इन ट्वीट का स्नैपशॉट भी निकाल लिया। अनुराग के इन 2 Tweet का हिन्दी में लब्बोलुआब कुछ यूं है –

“जब आपके माता पिता को धमकी वाले कॉल आने लगें और बेटी को ऑनलाइन धमकियां मिलने लगे इसका मतलब साफ है कि अब कोई बात नहीं करता चाहता। अब तार्किक होने का कोई मतलब नहीं है। अब ठग राज करेंगे और गुंडई ही जिंदगी जीने का नया तरीका होगी। इस न्यू इंडिया के लिए आप सबको बधाई। अब मैं और बिल्कुल भी नहीं बोलूंगा। गुड बाय”

अनुराग पिछले कुछ वक्त से कई मुद्दों पर खुलकर Tweet कर रहे थे… अपनी राय रख रहे थे। चाहे मॉब लिंचिंग का मुद्दा हो या कि कश्मीर से 370 हटाने का। कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद कश्यप ने सीधे पीएम मोदी पर हमला बोला था और लिखा था कि – “एक आदमी को लगता है कि वो जानता है कि 120 करोड़ लोगों के लिए क्या सही है और इसे लागू करने के लिए उसके पास पावर भी है”

अनुराग को पिछले काफी वक्त से ट्रोलर्स ने अपने निशाने पर ले रखा था और 370 पर आखिरी ट्वीट करने के बाद तो ट्रोलर्स ने उनपर और भी ज्यादा अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी। अब ये नीचे वाला ट्वीट देखिए और सोचना शुरू कीजिए –

सवाल ये है कि क्या सच में ऐसा होने वाला है ? आखिर अचानक से हमने दूसरी तरह की आवाजों को सुनना बंद क्यों कर दिया है। क्या हम ‘भेड़तंत्र’ में तब्दील होते जा रहे हैं ? अनुराग किसी खास मुद्दे पर सही कह रहे हैं या गलत, इस पर बहस हो सकती है लेकिन ये उम्मीद रखना कि सब एक तरह से ही सोचें क्या ठीक वैसा ही नहीं है जैसे आप भेड़ों को हांकना चाहते हैं ?

भेड़ें कभी कोई शिकायत नहीं करती। सिर झुकाए एक ही सीध में एक के पीछे एक झुंड में चलती रहती हैं। चरवाहा जिधर चलाना चाहता है उधर की लाठी हांकता है और तमाम भेड़ें बिना आवाज़ किए, बिना कोई सवाल पूछे उसी दिशा में चलना शुरू कर देती हैं। सवाल ये है कि क्या हम खुद को उन्हीं भेड़ों की जमात में शामिल करना चाहते हैं ?

कमाल की बात तो ये है कि Twitter पर कई लोगों ने अनुराग के ट्वीटर छोड़ने का जश्न मनाना भी शुरू कर दिया है। कई Tweets में तो लोग यहां तक खुश हो रहे हैं कि अब उनके बॉलीवुड और देश छोड़ने की उम्मीद भी वो लगाकर बैठे हुए हैं।

लेकिन ये प्रतिक्रियाएं क्या कहती हैं ? यही ना कि – “मुझे वो कोई आवाज़ पसंद नहीं जो मेरे जैसी नहीं है” आखिर ये किस तरफ जा रहे हैं हम ? आपको याद है वो वक्त, जब राजनीतिक डिबेट्स चाहे जितनी भी कड़वी हो जाए नुक्कड़ पर चाय की मुस्कराहट के साथ ही खत्म होती थी। लेकिन अचानक से हम ऐसे कड़वे क्यों हो गए कि अब Whatsapp पर भी कोई अपनी पॉलिटिकल सोच का ना मिले तो उसे ब्लॉक कर के अपनी पुरानी दोस्ती तोड़ देते हैं ?

अनुराग कश्यप CrazyFeed के दोस्त नहीं है जो हमारे सीने में स्पेशल दर्द होगा। लेकिन जब समाज में कुछ गलत होना शुरू होता है तो फिर उसे ठीक करने की जिम्मेदारी भी हम सबकी साझा ही है। दूसरी आवाज़ों को सुनना और उसका सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है। लेकिन अब करें तो क्या करें ? ऐसा लगता है कि हम उस दौर में पहुंच चुके हैं जब किसी को घंटा फर्क नहीं पड़ता। वक्त ही ऐसा चल रहा है कि सबको भेड़ बनने और दूसरों को भेड़ बनाने में ज्यादा मजा आ रहा है। दूसरे की आवाजों का भी सम्मान करना सीखिए और जब तक ये नहीं होता तब तक के लिए भेड़तंत्र जिंदाबाद.. !

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