Home ट्रेंडिंग बिस्कुट बनाने वाली कंपनी, ब्रिटैनिया और पारले जी अब बिस्कुट बनाने से डर रही हैं : वजह जान कर चिंता में पड़ जाएंगे !

बिस्कुट बनाने वाली कंपनी, ब्रिटैनिया और पारले जी अब बिस्कुट बनाने से डर रही हैं : वजह जान कर चिंता में पड़ जाएंगे !

17 second read
0
0
218

वैसे ये हेडलाइन लिखते समय कम से कम दस बार सोचा कि बिस्किट लिखें या कि बिस्कुट ! फिर सोचा, अरे जब तक ये चाय में गलकर गिर ना जाए तब तक इस बात से किसी को घंटा फर्क नहीं पड़ता कि जो गिरा है वो बिस्किट है या कि बिस्कुट। तो चलिए जो काम की बात बताने की है पहले वो बता देती हूं, शायद थोड़ा फर्क पड़ जाए !

विशेष टिप्पणी : मोदी जी के फैन्स को ये ख़बर “हज़म” करने के लिए बिस्कुट के साथ चाय भी पीनी पड़ सकती है !

तो जनाब पहली बात तो ये कि, ये वाली हेडलाइन आपको जानबूझ कर चौंकाने के लिए बिल्कुल भी नहीं लिखी गई। दरअसल ये तो वो हकीकत है जिसके मायने 5 रूपए के एक बिस्किट पैकेट से कहीं ज्यादा आपके घर की दाल रोटी से भी जुड़े हैं। और वो कैसे..? ये बात समझने के लिए आपको थोड़ा ठंडे दिमाग से आगे पढ़ना पड़ेगा।

ऐसे ही बिस्किट पैकेट हर घर में बड़े खास रहे हैं। चाहे बच्चा क्रिकेट खेलने जा रहा हो या घर पर मेहमान आए हों, ये 5 रूपल्ली वाला बिस्किट हर कहीं खप जाता था। लेकिन ऐसे बिस्किट बनाने वाली कंपनी ब्रिटैनिया और पारले जी ने बड़ी बात कही है। ब्रिटैनिया लिमिटेड के मैनजिंग डायरेक्टर वरूण बेरी ने एक कांफ्रेन्स में कहा है कि “अब कस्टमर 5 रूपए का बिस्किट पैकेट खरीदने से पहले भी दो बार सोच रहा है। ये देश की इकॉनॉमी में एक सीरियस इश्यू है”

पारले जी वाले भी इससे मिलती जुलती बात कह रहे हैं। पारले के कैटेगरी हेड मयंक शाह ने ब्लूमबर्ग क्विंट के साथ बातचीत में बिस्कुट इंडस्ट्री पर मंडराते बड़े ख़तरे की तरफ इशारा किया है। मयंक ने कहा है ->

“पिछले 6 महीने से लोग पहले जैसी बिस्किट की खऱीदारी नहीं कर रहे हैं। दुकानों से चलने वाला बिजनेस प्रभावित हो रहा है”

बिस्किट बनाने वाली कंपनियां मार्केट में घटती डिमान्ड की वजह से और ज्यादा प्रोडक्शन से डर रही हैं। लेकिन आप तो सोच रहे होंगे कि भई, इससे हमें क्या फर्क पड़ता है ? हमारे बाबूजी की कोई बिस्कुट की फैक्टरी थोड़े ही ना है !

लेकिन बाबू भईया… ये 5 रूपए के छोटे बिस्कुट के पैकेट वाली कहानी ना, इशारे बहुत बड़े बड़े कर रही है। थोड़ा ठहर कर समझिएगा तो दिमाग के सारे पेंच खुल जाएंगे। ये कहानी बता रही है कि लोगों की क्रयशक्ति में यानि की खरीदने की क्षमता में जाहिर तौर पर गिरावट आई है। ये देश की इकॉनॉमी के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

इकॉनॉमिक स्लोडाउन हर सेक्टर को ऐसे ही पटक रहा है !

ऑटोमोबाइल सेक्टर में पहले से ही मंदी और छंटनी का हाहाकार मचा हुआ है। आज ही (20 अगस्त 2019) सुबह सुबह इंडियन स्पिनिंग इंडस्ट्री ने अखबारों में विज्ञापन छपवा कर बताया कि उनका धंधा कितने बुरे दौर से गुजर रहा है और कितने लोगों की नौकरियां अब इसकी वजह से जा सकती हैं।

इसी महीने 7 अगस्त को भारत की सबसे बड़ी वाहन कंपनियों में से एक महिन्द्रा एंड महिन्द्रा ने साफ चेतावनी दी कि ऑटो सेक्टर से लाखों लोगों की नौकरियां जा सकती हैं। बिजनेस वेबसाइट लाइवमिंट की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर पवन गोयनका ने मुंबई में स्टेटमेंट दिया है कि “ऑटोमोबाइल के चार सेक्टर्स – OEM, SUPPLIERS, DEALERS और UNORGANISED SECTOR में नौकरियां छूटनी शुरू हो गई हैं”

इन्फोग्राफिक्स सौजन्य : दैनिक भास्कर अखबार

Live Mint में ही 16 अगस्त को पब्लिश्ड एक दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक मारूति सुजुकी ने कारोबारी मंदी की वजह से 3000 टेंपररी वर्कर्स की नौकरी जाने की बात मानी है।

आरबीआई के पुराने चीफ रघुराम राजन बार बार कह रहे हैं कि भारत में आया इकॉनॉमिक स्लोडाउन बेहद खतरनाक है और ये चिंता करने वाली बात है। क्योंकि आज कुछ सेक्टर्स से नौकरियां जाने की शुरूआत हो रही है लेकिन ये धीरे धीरे बाकी सेक्टर्स में भी पांव पसारने के संकेत दिखा रहा है।

क्या अब आपको समझ में आ रहा है कि 5 रूपए के बिस्किट से शुरू होने वाली कहानी आखिरकार कहां तक जा रही है ?

Load More Related Articles
Load More By Rashmi Saxena
Load More In ट्रेंडिंग

Check Also

अरे वाह! रिंकू भाभी ने दी खुशखबरी, जल्द पकड़ सकती है कपिल का हाथ!

जी हां, रिंकू भाभी ने अपने चाहनेवालों को खुशखबरी देने की तैयारी कर ली है। जल्द ही वो कपिल …