Home फिल्मी CHHICHHORE REVIEW : 250 ग्राम 3 IDIOTS + एक चम्मच STUDENT OF THE YEAR + छंटाक भर जो जीता वही सिकंदर !

CHHICHHORE REVIEW : 250 ग्राम 3 IDIOTS + एक चम्मच STUDENT OF THE YEAR + छंटाक भर जो जीता वही सिकंदर !

8 second read
0
0
135

250 ग्राम 3 IDIOTS + एक चम्मच STUDENT OF THE YEAR + छंटाक भर जो जीता वही सिकंदर = 1 गरमागरम छिछोरे !

जी हां यही है रेसिपी आज रिलीज हुई छिछोरे की ! उम्मीदें तो बहुत थी क्योंकि दंगल वाले नीतेश तिवारी इसे बना रहे थे। लेकिन ऐसा लगा कि तीन तीन फिल्मों के मसाले मिलाने के चक्कर में छिछोरे फिल्म का असली स्वाद और मज़ा ही कहीं गायब हो गया !

दिल थाम के पूरा रिव्यू पढ़िएगा क्योंकि टिकट के पैसे लिखने वाले की जेब से गए हैं भई !

छिछोर शुरू होती है तो इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल से। पहला सीन देखते ही फील आता है थ्री इडियट्स का। पहले सीन में ही हॉस्टल में वरूण शर्मा और सुशांत एक दूसरे पर बाल्टी भर भर के पानी फेंकते नज़र आते हैं। ऐसा लगता है कि इस सीन में कोई ज़बरदस्त मज़ा.. कोई ज़बरदस्त लॉजिक या फिर कोई ज़बरदस्त पंच होगा, लेकिन ये पहला सीन ही बुरी तरह निराश करता है

ख़ैर.. पहले सीन से ही आप नतीजे पर नहीं पहुंच सकते। वैसे भी टिकट खरीद के बैठे थे, लिहाजा पहला सीन देखकर थियेटर से बाहर तो निकलना था नहीं। आगे थोड़ी ही देर में फिल्म सुशांत, श्रद्धा और बाकी के किरदारों का बूढ़ा अवतार दिखाती है। और बस यहीं से फिल्म का “शीघ्रपतन” शुरू होता है। दरअसल इसके बाद फिल्म इतनी बार फ्लैशबैक में जाती और वापिस आती है कि इंटरवल तक आप भयंकर बोर हो चुके होते हैं।

खैर इंटरवल होता है और फिर इंटरवल के बाद फिल्म का स्टूडेंट ऑफ द इयर वाले मोड में पहुंच जाती है। जहां सब के सब कॉलेज के गेम कॉम्पीटिशन के पीछे भाग रहे हैं और सबको कॉलेज की वो ट्रॉफी जीतनी है। थोड़ी देर और फिल्म चलती है और फिर फिल्म “जो जीता वही सिकंदर” वाले अंदाज़ में प्रवेश कर जाती है। और इन सबके बीच वो थ्री इडियट वाला मोड पीछे छूट जाता है। लेकिन फिल्म खत्म होने से ठीक पहले एक बार फिर से थ्री इडियट मोड में वापिस जाती है जब सुशांत का किरदार हॉस्पिटल के आईसीयू में एडमिट अपने बेटे को हौसला दिलाता है।

खैर फिल्म की कहानी तो हम आपको यहां नहीं बता रहे लेकिन कुल मिलाकर कहानी बार बार बीच में टूटती है, इसलिए उसकी परवाह तो छोड़ ही दीजिए। हां, इस फिल्म में एक चीज जो सबसे ज़बरदस्त है वो है इस फिल्म की मोरल ऑफ द स्टोरी ! और वो ये है कि फेल होना लाइफ का द एंड नहीं है। सुशांत और श्रद्धा का काम “कामचलाऊ” है। बुढ़ापे वाले इमोशनल सीन में दोनों ही अपने किरदारों के साथ मशक्कत करते हैं। हां, वरूण शर्मा अपने हर किरदार में ज़बरदस्त हैं। दूसरा एक्टर जो इस फिल्म में इंप्रेस करता है वो है – नवीन पॉलीशेट्टी ! बाकी सब उपर उपर से खेल रहे हैं गुरू !

म्यूज़िक और गानों की बात करें तो वो काफी औसत हैं। कोई भी गाना ऐसा नहीं है जो आपको लंबे समय तक याद रहे। कॉमेडी वाले पंच की बात करें तो सिर्फ और सिर्फ वरूण शर्मा और नवीन पॉलीशेट्टी ही तरीके से वो काम पूरी फिल्म में करते नज़र आते हैं।

खैर… कोई भी फिल्ममेकर काफी मेहनत से एक फिल्म बनाता है। छिछोरे को लेकर उम्मीदें भी काफी ज्यादा थी। इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल में जीवन बिताने वाली जनता को ये फिल्म भी कितनी पसंद आएगी ये कह पाना थोड़ा मुश्किल है।

खैर.. आखिरी रवायत के तौर पर आप अगर हमसे स्टार्स वाली रेटिंग मांग रहे हैं तो वैसे तो हम इसके सख्त खिलाफ़ हैं लेकिन रिव्यू को सारतत्व समझाने के लिए चलिए आपको बता ही देते हैं। हमारी तरफ से सिर्फ 2.5 स्टार्स और वो भी फिल्म के थोड़े अलग क्लाईमैक्स, वरूण शर्मा, नवीन पॉलीशेट्टी और सुशांत सिंह राजपूत की हिम्मत वाली एक्टिंग के लिए !

ए.. डायलॉग राइटर के पैसे काटियो रे ज़रा !
Load More Related Articles
Load More By Rashmi Saxena
Load More In फिल्मी

Check Also

अरे वाह! रिंकू भाभी ने दी खुशखबरी, जल्द पकड़ सकती है कपिल का हाथ!

जी हां, रिंकू भाभी ने अपने चाहनेवालों को खुशखबरी देने की तैयारी कर ली है। जल्द ही वो कपिल …