Home ट्रेंडिंग लो जी… मार्केट में नई स्कीम आई : कोरोना बीमारी लो और लखपति बन जाओ !

लो जी… मार्केट में नई स्कीम आई : कोरोना बीमारी लो और लखपति बन जाओ !

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कोरोना वायरस का फिलहाल तो ये आलम है कि जरा सा कोई बगल में खांस या छींक दे तो चेहरे पर हवा हवाई दौड़ने लगती है। लेकिन कोरोना वायरस पर नई वाली खबर या यूं कहिए कि नई वाली स्कीम जो आई है वो कुछ लोगों को लुभा सकती है। जी हां, लंदन के मार्केट में कोरोना बीमारी से ग्रसित होने के लिए करीबन 3 लाख 40 हजार रूपए का इनाम दिया जा रहा है।

अब आप सोच रहे होंगे कि लिखने वाला क्या अंट शंट लिखे जा रहा है, तो जनाब नीचे ज़रा डीटेल में पढ़ लीजिए !

दरअसल मामला कुछ यूं है कि लंदन के वैज्ञानिक इस समय बड़ी शिद्दत से कोरोना वायरस की काट ढूंढने में जुटे हैं। अब इस साइंटिफिक प्रयोग के लिए उन्हें चाहिए ऐसी ह्यूमन बॉडी़ज जहां वो कोरोना वायरस की ग्रोथ पर नज़र रख सकें और उसकी काट यानि कि मेडिसीन या टीका ढूंढ सकें। अब ऐसे में उन्हें एकदम फ्रेश ह्यूमन बॉडी की जरूरत है जिसे सबसे पहले कोरोना वायरस से संक्रमित कराया जाएगा और फिर उसका एंटीडॉट ढूंढा जाएगा।

अब इस खतरनाक काम के लिए लंदन के वैज्ञानिकों ने इनाम की रकम भी रखी । और ये रकम है – 3500 पाउंड। अगर इसे इंडियन करेंसी में बदलेंगे तो ये रकम होती है करीब 2 लाख 40 हजार के करीब ! लंदन के मशहूर अखबार डेली मेल ने वैज्ञानिकों की इस खोज और कोरोना वायरस लेने वाली इस वैकेन्सी की खबर अपने अखबार में भी पब्लिश की। यकीन नहीं आता तो ये नीचे वाला ट्वीट पढ़ लीजिए –

लंदन के साइंसदानों को ऐसे 24 स्वयंसेवकों की जरूरत है जो 3500 पाउंड लेकर अपना शरीर मेडिकल रिसर्च के नाम दान कर दें। ऐसा करना जीते जी और समझते बूझते मौत को गले लगाने जैसा है क्योंकि अभी तक कोरोना वायरस का कोई भी इलाज पूरी दुनिया में नहीं ढूंढा जा सका है। यानि सीधे सच्चे और साफ शब्दों में ये भी कह सकते हैं कि लंदन के वैज्ञानिक 3500 पाउंड हाथ में लेकर कोरोना से लड़ने वाले जांबाजों के इंतजार में हैं।

खैर… अब जब ये 24 लोग लंदन के वैज्ञानिकों को मिल जाएंगे, फिर क्या होगा.. अब ये भी समझ लीजिए। सबसे पहले इन 24 लोगों के शरीर में कोरोना वायरस का कमजोर स्ट्रेन डाला जाएगा। फिर वैज्ञानिक ये रिसर्च करना शुरू करेंगे कि आखिर ये वायरस मानव शरीर में बढ़ता कैसे है और फिर इसके बाद उनके शरीर में एचवीवो कंपनी द्वारा बनाई गई दवा डाली जाएगी।

चीन में भी साइंटिस्ट दवा ढूंढने में दिन रात एक किए हुए हैं
Image Courtesy : The New York Times

एचवीवो की दवाई शरीर में डालने के बाद इन 24 लोगों को 14 दिनों तक एकांत में रखा जाएगा और इनके शरीर में होने वाले बदलावों पर कड़ी नज़र रखी जाएगी। आपको बता दें कि कोरोना वायरस को लेकर UK में कोहराम मचा हुआ है। इसके लिए दवाई खोजने की रिसर्च पर होने वाले खर्चों का आलम ये है कि सरकार ने अपनी तरफ से 440 करोड़ रूपए का बजट जारी कर दिया है।

इस वक्त यूरोपियन देशों की 35 दवा कंपनियां कोरोना वायरस की काट ढूंढने में जुटी हैं। और ये कोरोना वायरस अपने शरीर में लेने के बदले पैसों वाली स्कीम भी इन दवा कंपनियों की कवायद का हिस्सा हैं। जाहिर तौर पर अब तक अलग अलग तरह के संक्रमणों से दुनिया जूझती रही है। लेकिन कोरोना ने पूरी दुनिया को छठी का दूध याद करा दिया है और ये बता दिया है कि भले ही वायरस नंगी आंखों से नज़र भी ना आता हो लेकिन इतनी बड़ी दुनिया को निगल जाने के लिए वो अकेला ही काफी है !

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