Home ट्रेंडिंग WAR & PEACE : इस किताब पर सारा ड्रामा एक “बेवकूफ़ाना” रिपोर्टिंग की वजह से हुआ है !

WAR & PEACE : इस किताब पर सारा ड्रामा एक “बेवकूफ़ाना” रिपोर्टिंग की वजह से हुआ है !

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जी हां, जिसने भी भारत के न्यूज़रूम्स में काम किया है उसे पता है कि वहां गलत रिपोर्टिंग करने वाले को गधा या बेवकूफ इसी उपनाम से पुकारा जाता है। यानि जिस रिपोर्टर ने भी इस ख़बर को लेओ तोल्सतोय की WAR & PEACE के नाम से डेस्क पर पहुंचाया वो गधा नहीं एकदम “विशुद्ध गधा” था ! कल से ही हर जगह ये खबर ट्रेंड कर रही थी कि टॉल्सटोय की किताब WAR & PEACE को बॉम्बे हाईकोर्ट के जज ने आपत्तिजनक बता दिया है। सोशल मीडिया पर खूब हायतौबा मच गई। कुछ लोग छाती भी पीटने लगे कि भईया हिन्दुस्तान में क्या हो रहा है। लेकिन अब जब असली सच सामने आया है तो एक बेवकूफाना और हड़बड़ाहट वाली रिपोर्टिंग की असली पोल खुल गई है।

अब जो हकीकत हम आपको बताने जा रहे हैं उसके बाद उस रिपोर्टर को अपने बॉस से पक्का डांट पड़ने वाली है और वो उसे गधा बोल के हड़काने वाला है !

बवाल मचने के बाद दरअसल इन जज साहब ने अपनी सफाई पेश की है जिन्हें लेकर कल से हायतौबा मची है। जस्टिस कोतवाल ने मामले पर रौशनी डालते हुए पूरे मामले से परदा उठाया है और बताया है कि आखिर बेवकूफी हुई कैसे ?

जस्टिस कोतवाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उन्हें भी अच्छी तरह से पता है कि लेओ तोल्सतोय की किताब विश्व इतिहास और साहित्य में कैसी जगह रखती है और वो कैसा “Epic उपन्यास” है। मैंने तो कोर्टरूम में जिस किताब के बारे में कहा था वो दूसरी किताब थी, हां उसका नाम वॉर एंड पीस से काफी मिलता जुलता था।

जस्टिस कोतवाल ने जिस किताब पर आपत्ति जताई थी उस किताब के लेखक बिस्वजीत रॉय थे और किताब का नाम था – WAR & PEACE IN JANGLEMEHAL : PEOPLE, STATE & MAOISTS

लेकिन ऐसा लगता है कि शुरूआती रिपोर्टिंग करने वाले लोग इतनी हड़बड़ी में थे कि ब्रेकिंग न्यूज़ मिलने के चक्कर में कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो गए। थोड़ी ही देर में खबर लेओ तोल्सतोय की किताब वॉर एंड पीस के नाम से ट्रेन्ड करने लगी और लोग सोशल मीडिया पर हायतौबा मचाने लगे।

वैसे वाकई, अगर जज साहब तोल्सतोय की किताब का जिक्र करते तब तो वाकई स्थिति चिंताजनक हो ही जाती। लेकिन इस बार हल्ला मचाने की हड़बड़ी में भारी गड़बड़ी हो गई। दरअसल जिस शख्स के खिलाफ चल रहे मुकदमे की सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की गई, उसके यहां छापे के बाद बरामदगी में यही किताब मिली थी। और ये बात पुलिस के पंचनामे में भी दर्ज है

जज का कहना है कि वो पंचनामे में दर्ज बरामद हुई किताब के बारे में अपनी राय रख रहे थे, लेकिन मीडिया ने उनके मुंह में अपने हिसाब से बातों को ठूंस दिया. और फिर लोग सोशल मीडिया पर होने लगे जज्बाती !

खैर.. जब मामला हद से ज्यादा ट्रेन्ड में छाने लगा तो घबराए घबराए जस्टिसस को अपनी सफाई देने सामने आना ही पड़ा। जस्टिस कोतवाल के सफाईनामे को INDIA TODAY जैसे अहम मैगजीन्स ने अपनी वेबसाइट पर जगह दी है लेकिन प्रॉबल्म ये रही कि लोगों को पुरानी खबर की जुगाली करने में ही काफी देर तक मजा आता रहा।

हालांकि बाद में जज साहब की बात रखने भी सोशल मीडिया पर कई लोग सामने आ गए। और वो इस तमाम वाकये को ट्वीट के जरिए सामने रखने लगे।

कुछ लोगों ने ट्वीट के जरिए उस बुक का कवर पेज भी शेयर किया जिसकी बात की जा रही थी।

हालांकि अब इसके बाद ट्विटर और सोशल मीडिया पर एक अलग बहस ही छिड़ गई है। तर्कों और कुतर्कों का दौर चल रहा है। कुल मिलाकर कहानी ये है कि सच को कबूल करने में कई लोगों का “इगो” उनके रास्ते की अड़चन बनने लगता है।

खैर.. जिस किताब पर विवादास्पद बयान को लेकर पूरा देश खौल रहा था। ये है उस ख़बर की हकीकत। गलत तरीके से रिपोर्टिंग करने के लिए रिपोर्टर महोदय को हड़काया जाना बेहद जरूरी है।

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