Home ट्रेंडिंग नफरत की लाठी तोड़ो : ये वाली ख़बर पढ़ो और देखो प्यार की ताकत कितनी बड़ी है !

नफरत की लाठी तोड़ो : ये वाली ख़बर पढ़ो और देखो प्यार की ताकत कितनी बड़ी है !

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नफरत करने वाले आजकल खूब “ट्रेन्ड” कर रहे हैं। नफरती लोग आजकल बड़े COOL भी माने जा रहे हैं। लोग सोशल मीडिया पर इनसे “पंगा” लेने से डरते हैं ! और कुछ इसी का असर कह लीजिए कि नफरती लोग हमेशा एक अलग किस्म के “फख्र” या यूं कहिए कि “गर्व” में ऐंठे रहते हैं कि वो अपनी कौम यानि कि अपने धर्म वालों के बारे में सोचकर महान काम कर रहे हैं।

नफरती हिन्दू मुसलमानों को नहीं देखना चाहता और नफरती मुसलमान भी हिन्दुओं का मज़ाक उड़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ते !

और ये वाली जो ख़बर है ना, वो चाहे नफरती मुसलमान हो या फिर नफरती हिन्दू दोनों के लिए एकदम क्रोसिन 500 का काम करेगी। माने कि नफरत का बुखार एकदम से उतर जाएगा। जी हां, अगर नफरत नापने का थर्मामीटर पास में है तो कांख में दबा लीजिए और आगे पढ़ते जाइए कि हुआ क्या है ?

वैसे ये वाली ख़बर तस्वीर से शुरू करते हैं। आपको समझ में भी अच्छे से आएगा और बात गहराई से आपके दिमाग में उतरेगी। सबसे पहले ये नीचे वाली फोटू को देखिए और बताइए कि इस भाई को आप पहचानते हैं क्या ?

जी हा, पहचान तो गए ही होंगे आप
ये गुजरात दंगों के पोस्टर बॉय हैं – अशोक मोची

गुजरात दंगों के दौरान ये तस्वीर लगभग हर किसी ने देखी थी। हाथ में लोहे का सरिया लहराते अशोक मोची “हिन्दू धर्म को बचाने वाले कट्टर पोस्टर बॉय” बन गए थे। नफरत करने वालों के हीरो। गंदे और खून बहाने वाले मुसलमानों को असली सबक सिखाने वाला हिन्दू योद्धा ! लेकिन इस तस्वीर के 17 साल बाद की हकीकत पता है आपको ? बताते हैं लेकिन उससे भी पहले गुजरात दंगे की एक और ये दूसरी तस्वीर देखिए –

इनको भी पहचानते ही होंगे आप
गुजरात दंगों के दौरान का दूसरा चेहरा (कुतुबद्दीन अंसारी)

यानि दो चेहरे देखे आपने। एक नफरत करता हुआ चेहरा और दूसरा हाथ जोड़कर बचने की गुहार लगाता हुआ चेहरा। अब ज़रा आप एक कल्पना कर के बताइए कि गुजरात दंगों के दौरान ये दोनों एक दूसरे से मिलते तो क्या होता ? शायद दोनों ही एक दूसरे के खून के प्यासे हो उठते। क्योंकि दोनों के दिल में उस वक्त नफरत का समंदर बह रहा होगा। लेकिन अब तीसरी तस्वीर देख लो प्यारे, फिर पता चलेगा कि नफरत कितनी “फौरी” चीज़ है !

ये वही दोनों हैं अब पक्के दोस्त हैं

गुजरात दंगों के समय नफरत का सरिया उठाने के आरोपी अशोक मोची और कुतुबद्दीन अब अच्छे दोस्त हैं। शायद अशोक कभी किसी वजह से मुस्लिमों से नफरत करते रहे होंगे लेकिन अब का आलम ये है कि अशोक ने जब अपनी नई दुकान खोली तो उसका उद्घाटन करने के लिए किसी नेता, मंतरी या संतरी को नहीं बल्कि कुतुबद्दीन को बुलाया !

कुतुबुद्दीन और अशोक की ये तस्वीर अभी पिछले हफ्ते की ही है। ये तस्वीर बहुत कुछ कहती है। ये कोई मामूली बात नहीं है। ये वो प्यारी और असल बात है जिसे हम सबको समझने की ज़रूरत है।नफ़रत के चलते किए काम एक दिन पछतावे का सबब बनते हैं, और प्यार मुहब्बत भाई चारे से किए कामों की दुनिया मिसाल देती है

भारत के हिंदू और मुसलमानो को जब साथ रहना ही है, तो क्यों न प्यार से रहा जाए। इस बात को जितना जल्दी समझ लेंगे उतना हमारा और देश का फ़ायदा है। क्यूँकि लड़वाने वाले तो बड़े बड़े मंत्री बन जाते हैं, और लड़ने वाले फिर काटते रहते हैं अदालतों या जेलों के चक्कर !

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