Home ट्रेंडिंग मुलायम सिंह के गांव से रैगिंग का ऐसा भयानक वीडियो सामने आया है जैसे ”शाकाल” खुद रैगिंग ले रहा हो !

मुलायम सिंह के गांव से रैगिंग का ऐसा भयानक वीडियो सामने आया है जैसे ”शाकाल” खुद रैगिंग ले रहा हो !

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शाकाल याद है आपको ? हां. हां… वही 1980 में आई फिल्म, जिसकी कहानी तो सब भूल गए लेकिन अपने टकले सिर पर हाथ फेरफेर कर बोलने वाले कुलभूषण खरबंदा को सबने याद कर लिया। आज भी गांव या शहर में कोई सिर मुंडाता है तो दोस्त लोग शाकाल बोल के ही टांग खींचते हैं। तो जनाब शाकाल फिर से जिंदा हो गया है पूरे 30 साल के बाद ! और इस बार शाकाल ने जो असली जिंदगी में कांड किया है, उसका वीडियो और तस्वीरें देखेंगे तो हिल जाएंगे !

इस बार शाकाल ने अपने 150 हमशक्ल तैयार कर दिए हैं !

मामला यूपी के पूर्व मुखिया मुलायम सिंह यादव के वीआईपी गांव सैफई का है। भई ऐसे हाईप्रोफाइल गांव में ही तो ऐसे फिल्मी कांड हो सकते हैं। यहां एक कॉलेज है – सैफई मेडिकल कॉलेज ! पूरा नाम – उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज. जैसे वो अपना दिल्ली वाला एम्स है ना, नाम वैसे ही एकदम उसी की तर्ज पर रखवाया है। लेकिन लगता है कि जमीन पर कॉलेज की रोपाई करते वक्त पढ़ाई लिखाई से ज्यादा रैगिंग के बीज गिर गए

ख़बर है कि यहां 1st Year के छात्रों के साथ रैगिंग हुई है। एक या दो नहीं बल्कि पूरे 150 छात्रों के सिर एकदम शाकाल वाले स्टाइल में मुंडवा दिए गए हैं। और रैगिंग करने वाले “मुखिया शाकाल” ने इन सभी “फ्रेशर शाकाल” को एक साथ लाइन में सिर झुकाकर क्लास में एंट्री करने का आदेश दिया है। क्लास खत्म होने के बाद इन सबको सिर झुकाकर लाइन से हॉस्टल में जाना पड़ता है। बीच में कोई सीनियर दिख जाए तो उसे झुककर प्रणाम भी करना होता है

वीडियो बन ही रहा था कि बीच में सीनियर आ गए, सब सिर झुकाकर तोहफा देने लगे !

फिल्मी कहानी लग रही है क्या ? वीडियो भी है.. देख लो… यूपी के किसी मुन्ना त्रिपाठी ने अपलोड की है !

लेकिन ये रैगिंग जो भी ले रहा है सच में बहुत बड़ा शाकाल है भाई ! और इसका अहसास आपको अब आगे की खबर पढ़कर होगा। अब 150 लड़कों के सिर मुंडाकर उनके एक लाइन में चलने की बात कोई मामूली बात तो थी नहीं। फौरन जंगल में आग की तरह मसला फैल गया। फिर पता चला कि पिछले 6 दिनों से ये रैगिंग चल रही थी।

सारी कहानी सरकार के चिकित्सा शिक्षामंत्री आशुतोष टंडन तक पहुंची। इसके बाद यूनिवर्सिटी कैंपस में भारी संख्या में पुलिस भी तैनात रही। लेकिन रैगिंग करने वाले शाकाल का इतना खौफ था कि एक भी स्टूडेंट पुलिस या प्रशासन के पास शिकायत करने नहीं गया। सब ऐसे ही सिर मुंडवाकर बकरियों की तरह एक लाइन में चलते रहे, लेकिन किसी ने चूं की आवाज़ तक नहीं निकाली.

लेकिन सबसे दिलचस्प मसला तो इस पूरे मामले पर यूनिवर्सिटी के वीसी साहब का बयान है। सुनिए !

सुना… रैगिंग कैसे की जाती है ?

मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के किस्से अक्सर काफी भयावह होते हैं। हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में रैगिंग के खिलाफ एंटी रैगिंग कमेटियां भी काम करने का दावा करती हैं। लेकिन सैफई के मेडिकलत कॉलेज में एंटी रैगिंग कमेटी से वहां रैगिंग करने वाला “शाकाल” कितना डर रहा है। ये तो आपको अब तक समझ में आ ही गया होगा !

नीचे कमेंट बॉक्स में आप भी इस बारे में अपनी राय रख सकते हैं। सुना सकते हैं अपने साथ हुई रैगिंग का किस्सा या फिर आप भी कभी रैगिंग लेने वाले शाकाल बने हों तो सैफई वाले शाकाल की तरफ से अपनी बात रख सकते हैं !

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