Home ट्रेंडिंग बेशर्म न्यूज चैनल 16 मजदूरों की हत्या पर सरकार से सवाल क्यों नहीं पूछ रहे?

बेशर्म न्यूज चैनल 16 मजदूरों की हत्या पर सरकार से सवाल क्यों नहीं पूछ रहे?

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औरंगाबाद में 16 मजदूर ट्रेन से कट कर मर गए

क्या हमारे न्यूज चैनलों ये सिर्फ एक ब्रेकिंग न्यूज भर है। क्या हमारे न्यूज चैनल सिर्फ मजदूरों की संख्या, उनकी डेड बॉडी और उनके इर्द गिर्द बिखरी रोटियां दिखाकर ही अपना कर्तव्य खत्म कर लेंगे ?

ये सवाल कौन पूछेगा कि इन मजदूरों के खून में किसके हाथ सने हैं ?अब आप गौर से एक एक बात सुनिए।

ये मजदूर रेल पटरियों के सहारे पैदल चलते चलते मध्य प्रदेश जा रहे थे। 35 किलोमीटर पैदल चलने के बाद ऐसे थके… ऐसे थके.. कि बेसुध होकर ट्रेन की पटरियों पर ही सो गए। ट्रेन आती है और इन्हें कुचलती हुई चली जाती है।

अब कुछ सवाल – 

#  आखिर बेशर्मी के साथ ट्रेन के टिकट क्यों बेचे गए ? तभी तो ऐसे गरीब जिनके पास पैसे नहीं थे वो पैदल पैदल ही निकले और मौत के मुंह में समा गए।

अब भले ही आपके तमाम नेता, प्रवक्ता और मंत्री बैठ कर ये बड़ी बड़ी बातें करते रहें। सरकार का बचाव करते रहें और ट्रेन टिकट पर सब्सिडी का बेशर्म गाना गाते रहें लेकिन हकीकत यही है कि इन मजदूरों के खून के दाग से आप लोगों के हाथ सने हैं।

Image Source..Navodaya Times

# दूसरा सवाल – मंत्री और नेता टीवी चैनलों पर बैठकर सिर्फ ढपली क्यों बजाते हैं ?

सरकार के समर्थकों को ये सुनकर बुरा लग रहा होगा लेकिन अगर टीवी चैनल पर और सोशल मीडिया पर सिर्फ गाल बजाने के बजाय अगर आपने इन मजदूरों को उनकी पुरानी जगह पर ही इमानदारी से राहत दे दी होती तो क्या ये पलायन को मजबूर होते ?

#  तीसरा सवाल – कोरोना में नीति बनाने वालों तुम्हारी रणनीति क्या है बॉस ?

पहले तो 2 लॉकडाउन में मजदूर जबरन कैद कर भूखे मरने को मजबूर कर दिए जाते हैं। फिर तीसरा लॉकडाउन और लापरवाही का सबूत है। आप मजदूरों के लिए ना खाने का इंतजाम कर पाते हैं और ना ही जाने का। वहीं दूसरी तरफ आप कहते हैं कि आप कारोबार के दरवाजे खोलने वाले हैं तो फिर इन बीते 40 दिनों में आप मजदूरों के दिल में ये भरोसा क्यों नहीं जगा पाए कि इन्हें पलायन करने की जरूरत नहीं। इन्हें रोटी, रोजगार और छत तीनों चीजें मिलेंगी।

Image Source..Caravan Daily

16 मजदूरों की मौत सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है। इंसानियत के नजरिए से देखोगे तो ये साफ साफ सामूहिक नरसंहार नज़र आएगा। राजनीति में आज भले ही नेता इंसानी लाशों पर पलने वाले गिद्ध बन गए हो लेकिन आने वाला वक्त इन मजदूरों के बिखरे हुए खून के छींटे तुम राजनेताओं के हाथों पर तलाश ही लेगा !

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