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भारतीय रेल आखिर जनता के साथ मजाक पर मजाक क्यों कर रही है ?

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भईया ये भारत में चल क्या रहा है ?
रेलवे डिपार्टमेंट कभी अनाउंस करता है कि टिकट बुक कराओ हम ट्रेन चलाने वाले हैं। फिर बुकिंग की वेबसाइट भी खोल दी जाती है। वेबसाइट राम राम करके चलती है और पहले से ही परेशान लोग जैसे तैसे टिकट बुक करते हैं। और अब खबर आ रही है कि 30 जून तक की ट्रेन टिकट कैंसल कर दी गई हैं।

आखिर ये क्या हाल है ?
क्या ऐसी ही हालत को शास्त्रों में अंधेर नगरी चौपट राजा की संज्ञा नहीं दी गई है कि रेल मंत्री से लेकर रेल विभाग तक को पता ही ना हो आखिर करना क्या है ? पहले 30 जून तक श्रमिक ट्रेन और स्पेशल ट्रेन के अलावा रेगुलर ट्रेन चलाने की भी अनाउंसमेंट होती है। टिकटें भी बिकनी शुरू हो जाती हैं। फिर अचानक 14 मई की सुबह खबर आती है कि श्रमिक और स्पेशल ट्रेन तो चलेंगी लेकिन भईया रेगुलर ट्रेन की टिकटें अब कैंसल हो जाएंगी और पैसे का रिफंड आपके अकाउंट में 30 जून तक वापिस आ जाएगा।

Image Source..The Economic Times

भईया अगर यही करना था तो ये ड्रामा किया ही क्यों ?
मतलब पहले इंसान परेशान होअपना टिकट बुक कराए.. फिर आप शहंशाह की तरह टिकट कैंसल करने का एलान करें और परेशान आदमी आपसे अपने रिफन्ड के पैसे वापिस हासिल करने के लिए टकटकी लगाकर इंतजार भी करे।सवाल ये है के चीजों और व्यवस्था को मैनेज करने में हो रही ये लापरवाही क्या माफी के काबिल है ? ऐसे वक्त में जहां देश में PANIC से हालात हैं ऐसे में लापरवाही से भरे अनाउंसमेंट आखिर क्यों पहले किए जाते हैं और फिर बाद में कैंसिल किए जाते हैं ?

Image Source..Startup Around

क्या जनता मजाक की चीज है ?
कोई संवेदना नहीं आपके अंदर ? आखिर कोई भी फैसला करने से पहले और अनाउंस करने से पहले सरकार सोचने का मामूली भर काम क्यों नहीं कर पा रही ? इससे पहले भी बीच लॉकडाउन में भारतीय रेल ने पहले टिकट बुक की थी फिर कैंसल की !जब मजदूरों को ले जाने की बात हुई तो श्रमिक ट्रेनों में भी गरीब मजदूरों से टिकट के पैसे वसूले गए। बाद में थू थू हुई तो सब्सिडी के दावे किए जाने लगे।

सवाल ये है क्या जनता लैब में रखी वो गिनी पिग है जिसपर सरकार एक के बाद एक अलग अलग एक्सपेरीमेंट करती जा रही है ?आप भी नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर बताइए कि रेल विभाग के इस ताजा अनाउंसमेंट पर आप क्या सोचते हैं ?

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