Home ट्रेंडिंग मजदूर पैदल जा रहे और सैंकड़ों बसें खड़ी हैं : आखिर राजनीति में “बेशर्मी” कौन कर रहा है ?

मजदूर पैदल जा रहे और सैंकड़ों बसें खड़ी हैं : आखिर राजनीति में “बेशर्मी” कौन कर रहा है ?

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दिल्ली से… गाजियाबाद से… नोएडा से… पैदल मजदूर हर तरफ से यूपी के अंदरूनी इलाकों में सफर कर रहे हैं। लेकिन बॉर्डर पर खड़ी बसों की कतार को चलने की परमिशन नहीं दी जा रही।
लेकिन ऐसा क्यों ? अमीरों को विदेश से लाने के लिए वंदे भारत मिशन चलाने वाली सरकार गरीबों के लिए ऐसे संगदिल क्यों हो गई है ?

आखिर मजदूरों के दर्द पर राजनीति की नौटंकी कौन कर रहा है, आप खुद तय कर लीजिए। हम आपको इसका एक एक सच बताते हैं।मामले की शुरूआत उस दिन से होती है जिस दिन प्रियंका गांधी कहती हैं कि अगर यूपी की सरकार मजदूरों के लिए बस का इंतजाम नहीं कर पा रही तो हम कर देते हैं। ये बात शायद यूपी सरकार के IGO को HURT कर गई फौरन कुछ घंटों की मोहलत दी गई कि 1000 बसों का इंतजाम कीजिए।

Image Source..The logical Indian

इसके बाद से ही 19 मई की सुबह कांग्रेस की तरफ से सैंकड़ों बसों की कतार यूपी बॉर्डर पर खड़ी हो गई लेकिन यहीं से फिर राजनीति ने अपना बेशर्म चेहरा भी दिखाना शुरू कर दिया।अब जब बसें खड़ी हो गई तो फिर यूपी की सरकार को बसों की पूरी डीटेल्स, फिटनेस सर्टिफिकेट, ड्राइवरों की डीटेल्स वगैरह सब कुछ चाहिए था।इस बीच बसें खड़ी रहती हैं और मजदूर पैदल जा रहे होते हैं। खैर…ये लिस्ट भी पहुंचाई जाती है। बाद में 19 की देर रात खबर आती है कि कांग्रेस की भेजी लिस्ट में गड़बड़घोटाला है।

Image Source..Business Standard

इस बार चिट्ठी यूपी प्रशासन की तरफ से सामने आती है। इस चिट्ठी में खुलासा किया जाता है कि बात तो 1000 बसों की की गई थी लेकिन लिस्ट में सिर्फ 879 बसें हैं। बस फिर क्या था एकदम चौकस यूपी सरकार कांग्रेस के खिलाफ FIR की तैयारी में जुट गई। भईया खूब FIR करो… गलत जानकारी देने पर जो करना है करो.. लेकिन जो भी 879 बसें खड़ी हैं उनका इस्तेमाल कर के मजदूरों को पैदल चलने से बचाओ तो सही।लेकिन इस वक्त भी बसें खड़ी हैं। 20 मई की सुबह कांग्रेस चेतावनी देती है कि अगर बसों का इंतजाम आज भी नहीं किया गया तो फिर शाम 4 बजे तक बसें वहां से हटा ली जाएंगी।

Image Source..Kfm

सवाल ये है कि इस राजनीति में पिस कौन रहा है ? वो गरीब जो सबके लिए वोट बैंक तो हैं, लेकिन वो गरीब हैं तो शायद सरकार इनके लिए बस तक चलाने की परवाह नहीं करती। बाकी अमीरों को विदेश से लाने के लिए तो वंदे भारत मिशन है ही !उफ्फ.. आखिर राजनीति करने वाले इतना नीचे क्यों गिर जाते हैं ? चलो मान लिया कि लिस्ट में कुछ बसें 1000 की संख्या से कम थीं। लेकिन क्या ये किसी भी तरह बसों को न चलने देने की वजह हो सकती है ?

आप नीचे कमेंट सेक्शन में इस बात पर अपनी राय जरूर रखिए कि आखिर मजदूरों के बस पर घटिया राजनीति कौन कर रहा है ? 1000 बसों के नाम पर 879 बसें देने वाली कांग्रेस या फिर बसों को न चलने देने वाली यूपी सरकार ?

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